बाराबनी में सियासी हलचल

चुनावी हिंसा मामले में टीएमसी के बाराबनी ब्लॉक अध्यक्ष के भाई इंद्रजीत सिंह उर्फ पिंटू गिरफ्तार

बाराबनी 
बाराबनी इलाके की राजनीति में उस समय भूचाल आ गया, जब 2021 के विधानसभा चुनाव के बाद हुई हिंसा समेत 2021 से 2026 तक डराने, धमकाने सहित कई मामले के आरोपी इंद्रजीत सिंह उर्फ 'पिंटू' को बाराबनी पुलिस ने मंगलवार को बलियापुर गांव से गिरफ्तार कर लिया। इस गिरफ्तारी ने क्षेत्र की राजनीतिक सरगर्मी तेज कर दी है। बुधवार को कड़ी सुरक्षा और केंद्रीय बलों की घेराबंदी के बीच पिंटू को आसनसोल अदालत में पेश किया गया। इसके बाद उन्हें न्यायिक हिरासत में जेल भेज दिया गया। इस गिरफ्तारी के बाद से विपक्षी दलों ने हमलावर रूख अपना लिया है। भाजपा और अन्य विपक्षी संगठनों का आरोप है कि चुनाव के दौरान अशांति फैलाने में पिंटू का नाम सबसे चर्चित चेहरों में था। लोगों का एक बड़ा तबका का आरोप है कि असित सिंह के राजनीतिक रसूख का फायदा उठाकर पिंटू इलाके में एक 'समानांतर सत्ता' चला रहे थे। सरकारी टेंडर, निर्माण कार्यों व विभिन्न सरकारी योजनाओं में उनकी दखल की लंबे समय से दबी जुबान में चर्चाएं होती रही हैं। पुलिस सूत्रों के अनुसार बीते किसी मामले में पिंटू कोर्ट पहुंचे थे। वहां से वो बलियापुर गांव पहुंचे जहां बाराबनी पुलिस ने पिंटू को धर दबोचा। पिंटू की गिरफ्तारी की खबर मिलते ही थाना  के बाहर बड़ी संख्या में लोग जुट गए, जिनमें कई ऐसे थे जो अतीत में उनके कथित कृत्यों से पीड़ित रहे थे। माहौल को तनावपूर्ण होता देख पुलिस ने तुरंत सक्रियता दिखाई और भारी सुरक्षा घेरे में पिंटू को वहां से सुरक्षित कोर्ट परिसर ले गये। इस पूरे प्रकरण पर आरोपी के परिवार या पार्टी की ओर से अभी तक कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है। हालांकि सियासी गलियारों में यह चर्चा जोरों पर है कि क्या यह गिरफ्तारी केवल कानूनी प्रक्रिया है या इसके पीछे आगामी चुनावों को लेकर कोई बड़ी राजनीतिक बिसात बिछाई जा रही है। बाराबनी विधायक अरिजीत रॉय ने कहा गिरफ्तार पिंटू इलाके का कुख्यात अपराधी और 15 वर्षों के अत्याचारों में से एक है। हम कानून पर विश्वास रखते हैं और न केवल पिंटू बल्कि उसके भाई ब्लॉक अध्यक्ष असित सिंह और दूसरे भाई विश्वजीत सिंह को भी  ढूंढकर गिरफ्तार किया जाना चाहिए। क्योंकि 15 साल के आतंक में ये दोनों भी बराबर के हिस्सेदार थे।